बहार बनकर वो आ रहे हैं

बहार बनकर वो आ रहे हैं
         चमन में कलियां खिला रहे हैं
हमें रूलाने को आये थे जो
          वो आप रो रो के जा रहे हैं
मेरी निगाहों में जो बसे थे
            वो दिल में आके समा रहे हैं
ख़ुदा ने ज़र दे दिया है जिनको
             उन्हें सब अपना बना रहे हैं
बढ़ा रहे हैं वो नफ़रतों को
              मोहब्बतों को घटा रहे हैं
ज़माने भर की ग़िलाज़तों से
               हम अपना दामन बचा रहे हैं
मुफ़ीद आये हैं मयक़दे में
               बुला बुला कर पिला रहे हैं
             मुफ़ीद क़न्नौजी

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