सियासत की गली में हर कोई अच्छा नहीं होता

सियासत की गली में हर कोई अच्छा नहीं होता 
किया जाता है  झूठा वादा  पर सच्चा नहीं होता 

गुलिस्ताने मुहब्बत  में  कभी  आती  न  वीरानी 
हमारे  दरमियां  पैदा   अगर  चम्चा  नहीं  होता 

(तसददुक खान)

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